कमल उपाध्याय की किताब ईलू पढ़ने का मौका मिला। कवर को देखकर किताब की कहानी का अंदाजा लगभग - लगभग लग गया था। कहानी पढ़ने के बाद ऐसा लगा कि कहानी तो कवर की तरह ही दमदार निकली।
मूलरूप से बच्चों के लिए लिखी गई इस किताब में बच्चों को प्रभावित करने के साथ - साथ बड़ों को प्रभावित करने का पूरा आनंद है।
कहानी ईलू नाम की एक चिड़िया के साथ आरंभ होती है जो अपने पिताजी के साथ मसूरी के जंगलों में रहती है। ईलू को बार - बार नहीं उड़ पाने के सपने आते हैं जिसके कारण उसकी रात की नींद प्रायः टूट जाती है। ईलू को अपने सपनों के साथ - साथ स्कूल फ्लाइंग चैम्पियनशिप के लिए भी तैयारी करनी है।
ईलू एक शाम अपने घर से निकल जाती है और फिर देर रात तक वापस नहीं लौटती। ईलू के पिता चीनो उसकी तलाश में निकल पड़ते हैं।
ईलू की घरवापसी होने तक हम मार्लो, किट्टो, कपिलो, पैरिटो और पिज्जो जैसे कई अन्य किरदारों से मिलते हैं।
मार्लो का कैरेक्टर पढ़कर आपको बहुत हँसी आएगी क्योंकि वो पक्षी होकर हैलीकॉप्टर में उड़ता है और पैराशूट लेकर आसमान में उड़ता है। चीनो का किरदार भी पिता के रूप में एक अलग छाप छोड़ता है। आपको इस किताब को एक बार जरुर पढ़ना चाहिए।
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